:
Breaking News

Patna News: बिहार में चिकित्सा क्षेत्र की नई क्रांति, IGIMS में रोबोटिक सर्जरी और AI तकनीक पर राष्ट्रीय मंथन

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

पटना के IGIMS में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में रोबोटिक सर्जरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की आधुनिक तकनीकों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि बिहार में अब आम मरीज भी अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी का लाभ उठा रहे हैं।

पटना/आलम की खबर:बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था तेजी से आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रही है। एक समय था जब जटिल सर्जरी और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई, चेन्नई या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। राजधानी पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) धीरे-धीरे ऐसे चिकित्सा केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहां आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

इसी दिशा में शनिवार को आईजीआईएमएस परिसर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ने चिकित्सा जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया और रोबोटिक सर्जरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा आधुनिक ट्रॉमा प्रबंधन में नई तकनीकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में चिकित्सा विज्ञान का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। जिस तरह से तकनीक हर क्षेत्र में तेजी से प्रवेश कर रही है, उसी तरह सर्जरी की दुनिया भी अब डिजिटल और रोबोटिक युग में प्रवेश कर चुकी है। इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ मरीजों को मिलने वाला है, क्योंकि आधुनिक तकनीक के जरिए ऑपरेशन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, अधिक सटीक और कम जोखिम वाले बन रहे हैं।

संगोष्ठी का उद्घाटन वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ. ए. ए. हई ने किया। कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बड़ा अवसर बताया। वक्ताओं ने कहा कि भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) डॉक्टरों की जगह नहीं लेगी, बल्कि डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता प्रदान करेगी।

कार्यक्रम के दौरान आईजीआईएमएस के गैस्ट्रो सर्जरी विभागाध्यक्ष एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने कहा कि बिहार अब चिकित्सा तकनीक के मामले में पिछड़ा राज्य नहीं रह गया है। उन्होंने बताया कि सरकारी संस्थान के स्तर पर आईजीआईएमएस में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है और इसका लाभ लगातार मरीजों तक पहुंच रहा है। उनका कहना था कि इस तरह की संगोष्ठियों का मुख्य उद्देश्य राज्य के चिकित्सकों को नई तकनीकों से जोड़ना और उन्हें आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति प्रशिक्षित करना है।

विशेषज्ञों ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी पारंपरिक ऑपरेशन की तुलना में कई मामलों में अधिक प्रभावी साबित हो रही है। इस तकनीक के माध्यम से सर्जन अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर ऑपरेशन कर सकते हैं। इससे शरीर में कम चीरा लगता है, रक्तस्राव कम होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है। यही कारण है कि दुनिया के कई विकसित देशों में रोबोटिक सर्जरी तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

कार्यक्रम में शामिल सर्जनों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि रोबोटिक तकनीक जटिल ऑपरेशनों को अधिक सटीक और सुरक्षित बनाने में मदद कर रही है। विशेष रूप से कैंसर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और यूरोलॉजी से जुड़े कई ऑपरेशनों में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए। इनमें रोबोटिक सर्जरी की बारीकियों, आधुनिक ऑपरेशन तकनीकों तथा ट्रॉमा मैनेजमेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। विशेषज्ञों ने बताया कि AI आधारित तकनीकें मरीज की स्थिति का त्वरित विश्लेषण कर डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता कर सकती हैं।

चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर आपात स्थितियों में AI आधारित सिस्टम भविष्य में जीवन बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डेटा विश्लेषण, रोग की पहचान और उपचार योजना तैयार करने जैसे क्षेत्रों में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

कार्यक्रम में आईजीआईएमएस के निदेशक डॉ. बिन्दे कुमार ने कहा कि संस्थान का लक्ष्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को आम लोगों की पहुंच तक लाना है। उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी जैसी सुविधाओं को अपेक्षाकृत कम खर्च में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीज भी इसका लाभ उठा सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में पहली बार सरकारी स्तर पर दा विंची रोबोटिक सर्जरी सिस्टम की स्थापना स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे राज्य के हजारों मरीजों को बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें अपने ही प्रदेश में विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा।

संगोष्ठी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा फेलोशिप कॉन्वोकेशन भी रहा। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चिकित्सकों को सम्मानित किया गया तथा उन्हें प्रतिष्ठित फेलोशिप प्रदान की गई। चिकित्सा समुदाय के लिए यह अवसर उपलब्धियों और ज्ञान के आदान-प्रदान का मंच बना।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह आधुनिक तकनीकों का विस्तार जारी रहा तो आने वाले वर्षों में बिहार देश के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी नवाचार न केवल मरीजों को बेहतर उपचार देंगे, बल्कि राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को भी नई दिशा प्रदान करेंगे।

यह भी पढ़ें:

• alamkikhabar.com/vaibhav-suryavanshi-emotional-story-team-india

• alamkikhabar.com/vikramshila-bailey-bridge-open-bhagalpur

• alamkikhabar.com/bihar-mlc-election-nda-candidates-announced

• alamkikhabar.com/patna-weather-rain-thunderstorm-alert

तकनीक और मानवता का संगम ही चिकित्सा का भविष्य

चिकित्सा विज्ञान का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि मरीज को बेहतर जीवन देना भी है। रोबोटिक सर्जरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकें इसी दिशा में एक बड़ा कदम हैं। हालांकि मशीनें कितनी भी आधुनिक क्यों न हो जाएं, चिकित्सा की आत्मा हमेशा डॉक्टर की संवेदनशीलता और अनुभव ही रहेगा।

बिहार जैसे राज्य में यदि आधुनिक तकनीक आम मरीजों की पहुंच तक पहुंच रही है तो यह केवल स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत भी है। जरूरत इस बात की है कि तकनीक का लाभ शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुंचे। जब आधुनिक विज्ञान और मानवीय संवेदना साथ चलेंगे, तभी स्वास्थ्य व्यवस्था वास्तव में मजबूत बन पाएगी।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *